गुरुवार, 7 जुलाई 2016

मैं कौन हूँ --------

मैं सुबह हूँ लेकिन उगता हुआ सूरज नहीं
मैं ढलता हुआ सूरज हूँ लेकिन शाम नहीं हूँ

मुझे एकांत पसंद है लेकिन मैं एकाकी नहीं
मुझे शराब पसंद हैं लेकिन मैं शराबी नहीं

मैं लक्ष्य की और उड़ता एक अकेला पंक्षी हूँ
अकेला उड़ता वह पंक्षी हूँ
जो एकांत में अकेला नहीं ,
  भीड़ में अकेला हूँ।

मुझमे वैराग , विलास , मानवता , फूहड़ता हैं
लेकिन मैं वैरागी , विलासी और आवारा नहीं हूँ





                                                          सिर से सीने में कभी पेट से पाओं में कभी
                                                       इक जगह हो तो कहें दर्द इधर होता है